अपने स्तनों की जांच कैसे करें

स्तन केन्सर का पता प्रारंभि क अवस्था में लगाना महत्वपूर्ण होता है क्योंकि आप सही समय पर वह उपचार ले सकते हैं जो आपका जीवन बचा पायेगा। स्तन केन्सर को प्रारंभि क अवस्था में पाने के लिए आप क्या कर सकते हैं वह यहां बताया गया है:

  • अपने डाक्टर से अपने स्तन की जांच हर 3 वर्षों में करवाएं यदि आप अपनी 20 और 30 वर्ष की आयु में हैं और इसे प्रत्येक वर्ष करवाएं यदि आप 40 वर्ष या इससे ज्यादा आयु की हैं।
  • यह जानकारी रखें कि आपके स्तन कैसे दिखते और (छूने पर) महससू होते हैं: और आपके स्तन के कि सी भी परिवर्तन के बारे में अपने डाक्टर को तत्काल बताएं। आपको अपने स्तन की स्वयं-द्वारा जांच (Breast self- examination- बी.एस.ई.) अपने 20वें वर्ष से शुरू कर देनी चाहि ए। यह पुस्ति का आपको बताएगी कि स्तन की स्वयं-द्वारा जांच कैसे की जाती है।
  • 40 वर्ष की आयु आरंभ होने पर अपने डाक्टर से पूछें की क्या आपके लि ए मैमोग्राम (स्तनों का एक्स-रे) करवाना ठीक रहेगा। 
  • यदि आपके कि सी निकटतम संबंधी जैसे माता, बहन या लड़की को स्तन का केन्सर हो चुका है, तो अपने डाक्टर को बताएं।
अपने स्तनों की जांच कैसे करें
स्तन की स्वयं-द्वारा-जांच करने के कई तरीके हैं। हो सकता है कि आपको यहां बताए गए तरीके से अलग तरीका सि खाया गया हो। वह भी ठीक है। अधि क महत्वपूर्ण यह है कि आप यह जान लें कि आपके लि ए कौन सा तरीका सबसे अच्छा है।

स्तनों की स्वयं-द्वारा-जांच महीने में एक बार करें, सामान्यतया मासि क धर्म शुरू होने के बाद सातवें से दसवें दिन के बीच। यदि आपके मासि क धर्म की अवधि ज्यादा लम्बी नहीं है, तो प्रत्येक महीने का एक दिन स्तन की जांच के लि ए निर्धा रित कर लें – उदाहरण के लिए, महीने का पहला दिन या संभवत: महीने का पन्द्रहवां दिन।

अपने स्तनों की स्वयं-द्वारा-जांच करते समय आप अपने स्तनों में आए बदलाव को देख रही होती हैं। आप इसे स्तन का केन्सर या सिस्ट (पानी जैसे द्रव्य से भरी गांठ) देखने के लिए नहीं कर रही होती हैं, बल्कि आप इसे पिछले माह की गई जांच से कुछ नयापन या भि न्नता देखने के लि ए कर रही होती हैं।

यहां इसको करने की विधि दी जा रही है:
  • शीशे के सामने खड़े होकर अपने स्तनों को देखें।
  • अब सो जाएं और दाएं हाथ से आपके बाएं स्तन और अपने बाएं हाथ से दाएं स्तन की जांच करें।
  • बैठें या या खड़े हो जाएं और अपनी कांखों को जांचें। 
शीशे के सामने खड़े होकर

  • जब शीशे के सामने खड़ी हों, तब अपने स्तनों को देखें: अपनी भुजाओं को अपनी बगलों में रखकर, इसके बाद अपनी भुजाओं को सि र से ऊपर उठाकर, फिर अपने हाथों से अपने नितम्बों को दबाकर, और अपने स्तन की मांसपेशियों को सख्त करके खींचते हुए।
  • अपने स्तनों में आए कैसे भी परिवर्तनों के लि ए देखें। स्तनों की चमड़ी या चूचि यों (निप्पल) के आकार, बनावट, गोलाई, गांठें, चक् कते, ललाई, जैसे परिवर्तनों के लि ए देखें। जब आप शीशे के सामने खड़ी हों तब अपने स्तनों में हो सकने वाले परिवर्तनों को देखें 
सीधे लेटकर



  • सीधा लेटने पर अपने स्तनों में आए बदलाव को महसूस करें
  • अपनी पीठ पर लेटें, दाहि ने कंधे के नीचे एक तकि या लगाएं और अपनी दाहि नी बाजु को सिर के पीछे लगाएं।

  • दाहिने स्तन में गांठों को महसूस करने के लि ए अपने बाएं हाथ की बीच की तीन उंगलि यों के निचले हि स्से (फिंगर पैड्स) को काम में लें। स्तन के ऊतकों को महसूस करने के लि ए फिंगर पैड्स को गोलाकार तरीके से ओवरलैप (Overlap) करते हुए घुमाएं। सीधा लेटने पर अपने स्तनों में आए बदलाव को महसूस करें अंगुलि यों के फिंगर पैड्स का इस्तेमाल करें न कि अंगुली के आगे वाले टिप्स का सीधे लेटकर हल्का दबाएं मध्यम रूप से दबाएं जोर से दबाएं
  • स्तन के सभी ऊत्तकों को महसूस करने के लिए दबाव के तीनों स्तरों का इस्तेमाल करें। चमड़ी के साथ जुड़े हुए ऊत्तकों को महसूस करने के लि ए हल्का दबाव जरूरी है, अधि क गहराई वाले ऊत्तकों को महसूस करने के लि ए मध्यम दबाव, तथा छाती और पसली के समीप के ऊत्तकों को महसूस करने के लिए ठोस दबाव जरूरी होता है। प्रत्येक स्तन की निचली गोलाई में एक ठोस लकीर सामान्य रूप से महसूस होती है।
  • आपके डाक्टर या नर्स को आपको सि खाना चाहिए कि कितने जोर से स्तन को दबाया जाए। स्तन के अगले भाग कि जांच करने से पहले यहॉ बताए गए प्रत्येक दबाव के स्तर का उपयोग स्तन उस भाग के सभी ऊत्तकों को महसूस करने के लिए करें।
  • अपने समस्त स्तन की जांच के लिए ऊपर-तथा-नीचे की ओर वाली विधि का इस्तेमाल करें।
  • ऊपर-तथा-नीचे की ओर वाली विधि का उपयोग कांख से आरंभ करके छाती के बीच की हड्डी के मध्य तक करें।, यह सुनिश ्चित कर लें कि स्तन के नीचे जाते हुए पसलि यों तक, तथा ऊपर तक गर्दन या गर्दन की हड्डी तक, पूरे स्तन क्षेत्र की जांच कर ली गई है।
  • इसी प्रकार बाएं स्तन की जांच दाएं हाथ के फिंगर पैड्स का उपयोग करते हुए करें। अपने समस्त स्तन की जांच के लिए ऊपर-तथा-नीचे की ओर वाली विधि का इस्तेमाल करें।
बैठकर या खड़े होकर
  • आप कांख (भुजा के अंदर) के हि स्से को इस तरह बेहतर महसूस कर सकेंगी।
  • बैठते या खड़े होते हुए और जब आपकी भुजा थोड़ी सी ऊपर उठी हुई हो तब प्रत्येक कांख को जांचें। जब आप सबसे पहली बार अपने स्तनों की जांच करना शुरू करेंगी उस समय आप क्या महसूस करती हैं यह जान पाना कठिन होगा। बार-बार अभ्यास करने के साथ आप अपने स्तनों के बारे में जानने लग जाएंगी। अपने स्तन के बारे में जांच के दौरान अपने अहसास के बारे में जानने की मदद के लि ए अपने नर्स या डाक्टर से भी पूछें क्योंकि वे ही आपके स्तनों की जांच करते हैं।
अपने डाक्टर से मिलें, यदि आप कोई लक्षण नोट करें:

  • लम्प (मुलायम गांठ), कठोर गांठ या स्तन में मोटापन 
  • स्तन के आकार या बनावट में बदलाव
  • चमड़ी में गड्डा, या सि कुड़न अथवा झुर्री
  • चूची या स्तन की चमड़ी पर चक् कता (रैश), ललाई या पपड़ी बनना
  • चूची से खून-से रंग के पानी या खून का बहना
  • स्तन में नया दर्द जो जा नहीं रहा होता है
  • चूची की हाल में हुई सि कुड़न
  • कांख में कठोर गांठ

0 comments: