.... तो लक्ष्मी बरसेगी आपके आंगन में

सादगी उसी श्रीमंत को शोभा देती है जिसके पास अपार धन दौलत हो। कोई गरीब यदि सच्चे मन से ही सादगी का गुणगान करे तो भी समाज में उसकी जग हंसाई ही होती है। अनुभव तो यही कहता है कि क्षमा उस विषधर को ही शोभती है, जिसके मुख में प्रचंड विष भरा हो। लक्ष्मी यानि कि धन-सम्पत्ति भी एक प्रकार का बल ही है। बल ही तो सच्चे, समर्थ और आनंदमयी जीवन की प्रथम जरूरत है। गरीबी भी एक प्रकार की निर्बलता ही है, और निर्बलता कैसी भी हो सदैव दु:ख को ही जन्म देती है। गरीब असमर्थ इंसान को दूसरों की ही नहीं, अपनों की भी उपेक्षा और अवज्ञा का सामना करना पड़ता है। ऐसों से रिश्तेदार भी दूर की राम-राम रखते हैं।
अब यदि कोई सच्चे मन से गरीबी के इस अभिषाप से मुक्ति पाना चाहता हो तो उसे प्राणपण से प्रयास करना होगा। धर्म-अध्यात्म के क्षेत्र में ऐसा ही एक उपाय है-मंत्र साधना। हर देवता को प्रभावित और प्रसन्न करने के लिये भिन्न मंत्र और प्रथ क साधना होती है। देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिये जो मंत्र और साधना नियम बताए गए हैं वे इस प्रकार है- 
मंत्र
धन-वैभव दाइनी विद्महे, विष्णु प्रियायै धी मही, तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात।
नियम-
  1. सूर्योदय से पूर्व स्नान कर उत्तर की और मुख करके बैठें, आसन स्वेत कम्बल का हो। 
  2. ऊपर दिये मंत्र का ५ मिनिट जप करने से पुर्व १५ मिनिट गायत्री मंत्र का जप करें। ध्यान रहे अनुपात १-३ का ही रहे। 
  3. अपनी मेहनत और ईमानदारी की कमाई का २-प्रतिशत भाग समाज की भलाई में अवश्य लगाएं। सूर्योदय के पश्चात कभी भूलकर भी नहीं सोएं। 
  4. अपनी दुकान, नोकरी, व्यवसाय अथवा जंहा भी आप कार्य करते हों पहुंचकर सबसे पहले २१ दाने चावल के देवी लक्ष्मी का ध्यान कर अर्पित करें। 
  5. अपना घर, दुकान अथवा जो भी व्यवसाय स्थल हो सदैव स्वच्छ, सुंदर एवं सुव्यवस्थित रखें। गंदगी और अव्यवस्था से देवी लक्ष्मीसदैव दूर ही रहती हैं।

0 comments: