अपना निवेश बेहतर समझदारी से कर सकती है



यदि आप किसी जॉब में कार्यरत है या फिर खुद का कोई व्यवसाय कर रही है तो यह लेख आप के लिए है । निचे दिए गए टिप्स की सहायता से आप अपना निवेश बेहतर समझदारी से कर सकती है :-

1. पूरा ब्योरा जरूरी
फाइनैंशल अडवाइजरों के मुताबिक, टैक्स और फाइनैंशल प्लानिंग में तालमेल जरूरी है। निवेश के दौरान रिटर्न, सिक्युरिटी, लिक्विडिटी, निवेश की अवधि, टैक्स बेनेफिट और रिस्क की पूरी जानकारी रखनी चाहिए। कार्वी प्राइवेट वेल्थ के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर स्वप्निल पवार ने बताया, 'टैक्स छूट के लिए आखिरी पलों में वैसे इंस्ट्रूमेंट में निवेश करना चाहिए, जो ज्यादा स्पष्ट हो।

2. सिंगल प्रीमियम लाइव कवर में बरतें सावधानी
कुछ कंपनियों ने धड़ल्ले से सिंगल प्रीमियम एंडॉमेंट पॉलिसी लॉन्च की है। अगर ये प्रॉडक्ट आपको सही लगते हैं तो भी यह पक्का करना न भूलें कि इसका सम एश्योर्ड सालाना प्रीमियम का कम से कम पांच गुना हो। ऐसा नहीं है तो आपको कुछ खास तरह के टैक्स बेनेफिट जैसे- प्रीमियम की रकम पर आयकर की धारा 80सी और मच्योरिटी की रकम पर 10 (10डी) के तहत मिलने वाली टैक्स छूट से हाथ धोना पड़ सकता है।

3. काम का नहीं आखिरी पलों में पीपीएफ इन्वेस्टमेंट
अक्सर लोग वित्त वर्ष के आखिरी दो महीने में पीपीएफ में मोटी रकम निवेश करने की सोचते हैं। ऐसे में उन्हें सालाना 8 फीसदी रिटर्न का लाभ नहीं मिलता। पीपीएफ पर ब्याज कमाने के लिए हर महीने की 5 तारीख से पहले निवेश करना चाहिए। चेक से पेमेंट में यह ध्यान रखें कि उस तारीख तक चेक क्लियर हो जाए।

4. जॉइंट लोन से डबल फायदा
कुछ दंपति जॉइंट लोन लेते हैं लेकिन यह समझने की भूल कर बैठते हैं कि उन्हें टैक्स छूट अलग नहीं बल्कि जॉइंट मिलेगी। यह धारणा गलत है। इस तरह के लोन पर 1.5 लाख रुपए तक के ब्याज भुगतान पर टैक्स कटौती का लाभ जॉइंट ओनर्स और दोनों कर्जदारों को मिल सकता है। प्रिंसिपल पेमेंट पर भी इसी तरह टैक्स छूट मिल सकती है।

5. प्रॉपर्टी बेचने के बाद सही वक्त पर करें निवेश
प्रॉपर्टी बेचने से मिली रकम को दोबारा निवेश करने के लिए 2 साल का वक्त विंडो (वक्त) मिलता है, लेकिन इसमें शर्त भी जुड़ी है। आरएसएम एस्ट्यूट कंसल्टिंग ग्रुप के फाउंडर सुरेश सुराना ने कहा, 'आयकर अधिनियम की धारा 54 के तहत रिहायशी घर बेचने से हासिल कैपिटल गेन पर तभी टैक्स छूट मिलेगी, जब उसका इस्तेमाल ट्रांसफर (रजिस्ट्री) से एक साल पहले या ट्रांसफर के दो साल बाद तक मकान खरीदने में किया जाता है। बिक्री की रकम से ट्रांसफर से तीन साल बाद मकान बनाने पर भी टैक्स छूट मिलेगी।'

6. 80सी के अलावा और भी बहुत कुछ
80सी के तहत 1 लाख रुपए की टैक्स छूट की सीमा से बाहर भी कई टैक्स बेनेफिट हैं। इनमें हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए), पैरेंट के मकान के किराए और उनके मेडिक्लेम प्रीमियम पेमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश पर भी कर छूट मिलती है।

7. टैक्स-फ्रेंडली सेविंग्स की अनदेखी न करें
आमतौर पर निवेशक मामूली टैक्स सेविंग्स का ध्यान नहीं रख पाते। कार्वी प्राइवेट वेल्थ के पवार ने कहा, 'मसलन, लोग एंप्लॉयी प्रॉविडेंट फंड (ईपीएफ) में निवेश करना भूल जाते हैं, जो 80सी के तहत कर छूट के लिए निवेश किए जाने वाले 1 लाख रुपए का हिस्सा है। इसी तरह पैरंट बच्चों की ट्यूशन फीस भी इसमें शामिल करना भूल जाते हैं।'

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