अर्ली ऑर्गेज्म को दूर भगाए |



जब आप के पति सहवास से पहले फॉरप्ले करते है और तभी डिस्चार्ज हो जाते है तो यह एक बीमारी के लक्षण है जिसे  अर्ली ऑर्गेज्म (शीघ्र स्खलन) ग्रेड-३ कहते है, इस वजह से सहवास की नौबत ही नहीं आ पाती। कभी-कभी सहवास की स्थिति बनती है तो प्रवेश से पहले ही तनाव खत्म हो जाता है, इसे  अर्ली ऑर्गेज्म (शीघ्र स्खलन) ग्रेड-२ कहते है । और प्रवेश के फौरन बाद हो जाता है तो अर्ली ऑर्गेज्म गेड-1 का नाम देते हैं। 

आपकी समस्या यदि ग्रेड-3 की समस्या है तो  इसके लिए आप डैपॉक्सिटिन-60 मिलीग्राम ( Dapoxetine 60) आदि की एक गोली सहवास से एक घंटा पहले एक गिलास पानी से ले लें। यह इसका जैनरिक नाम है। मार्केट में यह ड्यूरालास्ट-60 ( Duralast 60)और स्टेटॉल ( Staytal 60) नाम से मिलती है। एक बार लेने के बाद इस गोली का असर 1 घंटे बाद शुरू होकर 4 घंटे तक बना रहता है।

जो दूसरी समस्या आपको कभी-कभार सताती है कि प्रवेश से पहले ही तनाव घट जाता है तो उसके लिए आप देसी वायग्रा -100 मिलीग्राम ( Sildenafil Citrate ) की एक गोली सहवास से एक घंटा पहले लें। इस गोली के कुछ ब्रैंड नेम हैं : पेनिग्रा ( Penegra ), कैवेर्टा ( Caverta ) और एडिग्रा ( Edegra ) आदि। इससे आपकी समस्या में काफी बदलाव आ सकता है। इस गोली से सख्ती भी बढ़ती है और तनाव भी बरकरार रहता है। इस गोली का असर भी 1 घंटे बाद शुरू होकर 4 घंटे तक बना रहता है।

दोनों गोलियां एकसाथ ली जा सकती हैं, कोई नुकसान नहीं होता। दरअसल, एकसाथ लेने पर ये दोनों गोलियां सीनर्जेटिक इफेक्ट का काम करती हैं यानी एक-दूसरे की पूरक गोलियां हैं यानी एक-दूसरे के असर को और भी बढ़ा देती हैं, जिससे शीघ्र स्खलन और तनाव में कमी, दोनों समस्याएं एक साथ हल हो जाती है।

जो समस्याएं आपने बताई हैं, ज्यादातर उनका कारण मानसिक समस्या ही होता है। 3-4 बार सहवास करने के बाद इन दोनों गोलियों की मात्रा आधी कर दें। फिर अगले 3-4 सहवास के बाद दोनों की मात्रा एक चौथाई कर दें और फिर बाद में छोड़ दें। अगर यह समस्या वापस उभर जाए तो इन गोलियों का दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर शीघ्र स्खलन की समस्या चालू रहे तो डैपॉक्सिटिन-60 मिलीग्राम लें। अगर तनाव की कमी हो तो देसी वायग्रा का इस्तेमाल करे। हां, 24 घंटे में इनका सेवन सिर्फ एक ही बार करना होता है, इससे ज्यादा नहीं।

गोलियों के सेवन का यह इलाज टेम्परेरी ही है। अगर कोई इन समस्याओं का पर्मानेंट इलाज चाहे तो नियमित रूप से योग की अश्विनी और वज्रोलि मुद्राओं का अभ्यास किया करे। इन दोनों मुद्राओं का अभ्यास करने से जननांगों में खून का प्रवाह ज्यादा होने लगता है। साथ ही जो मसल्स क्लाइमेक्स या स्खलन या चरम अवस्था की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं, उन पर भी कंट्रोल होने लगता है। इन दोनों मुद्राओं का दो-तीन साल तक सही अभ्यास करने से ऐसी समस्याओं में काफी फर्क पड़ सकता है। दोनों मुद्राओं का अभ्यास 10 बार सुबह व 10 बार शाम को करें। खाली या हल्के पेट ही मुद्राओं का अभ्यास करना चाहिए।

नोट : 
ऊपर बताई गई गोलियों का सेवन अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही करें। कोई शख्स अगर हाई बीपी के लिए नाइट्रेट वाली दवा ले रहा है तो वह देसी वायग्रा न ले।

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