ध्यान लगाईये, दर्द से मुक्ति पाईये

कई मरीजों को किन्हीं परिस्थितियों में असहनीय दर्द होता है। मसलन कैंसर के रोगियों को दर्द से निजात दिलाने के लिए मॉर्फीन के इंजेक्शन तक लगाए जाते हैं। शारीरिक पीड़ा से मुक्ति दिलाने में ध्यान की भी बहुत बड़ी भूमिका है। ध्यान का अर्थ है विचारों को एकत्र कर उन्हें किसी बिंदू पर केंद्रित करना। चू्‌ँकि ध्यान शरीर के माध्यम से किया जाता है इसलिए श्वास-प्रश्वास पर नियंत्रण रखने के साथ ही पूरे शरीर की गतिविधियों को भी न्यूनतम किया जाता है। ध्यान दर्द महसूस करने वाले मस्तिष्क के केंद्र से हटकर कहीं ओर केंद्रित होता है तो दर्द भी गायब हो जाता है।

मन और मस्तिष्क में घटित होने वाले विचार बहुत चंचल होते हैं। वे क्षणांश में भटक कर कहाँ से कहाँ पहुँच जाते हैं। संसार से नाता रखने वाली इंद्रियों में चक्षु और वाया महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि ध्यान की स्थापना शुरू करने से पहले नेत्र बंद किए जाते हैं। साधक नेत्र खोलकर भी ध्यान लगाते हैं लेकिन बहुत अभ्यास के बाद ही यह स्थिति आती है। धार्मिक और अध्यात्मिक उपलब्धि के अतिरिक्त दर्द से मुक्ति के लिए प्रेक्षा ध्यान उत्तम माना गया है।
कैसे करें

  • प्रेक्षा ध्यान का अर्थ है मन की चेतना से देखना। मन की चेतना से देखने के लिए किसी आसन विशेष में बैठने की जरूरत नहीं है। मरीज लेटे-लेटे भी ध्यान की अवस्था में जा सकते हैं। पहले श्वास पर नियंत्रण करें। पूरे फेफड़े भरते हुए धीरे-धीरे छोड़ें। इससे नाड़ियाँ शिथिल हो जाएँगी। रक्त प्रवाह धीमा होने लगेगा। श्वास को नाक के अगले हिस्से पर छूकर अंदर आता हुआ महसूस करें।
  • कुछ अभ्यास के बाद श्वास गर्म है या ठंडी इसे महसूस करें। अब चेतना दर्द के केंद्र से हटकर नासाग्र पर स्थिर हो रही है ऐसा महसूस करें। कुछ समय के अभ्यास से यह आसान हो जाता है। अब चेतना को मस्तिष्क के सर्वोच्च शिखर पर जाता हुआ महसूस करें। यहाँ से चेतना को पूरे शरीर में हर अंगोंपांग पर लेकर जाना है। इसका सिलसिला मस्तिष्क के शिखर से शुरू होकर पैरों के तलवों की त्वचा के अंतिम हिस्से पर आकर खत्म होगा।
कैसे दूर होगा दर्द

  • पूरे शरीर में चेतना को घुमाते हुए दर्द के स्थान पर भी ले कर आना है. मरीज के लिए ऑटो सजेशन का भी बड़ा महत्व है. कैंसर सहित कई असाध्य रोगों के रोगी अपने आताम्बल के दम पे उस रोग पे विजय प्राप्त कर लेते है. अपनी चेतना को धयान में लाकर रोगी मन ही मन यह दोहराए के मेरा दर्द खत्म हो रहा है और इस प्रकार लगातार दोहराने पर अपने आत्मबल और आत्म विश्वास से ही यह संभव हो पाता है.

क्या रखे सावधानी 

  • मरीज को किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही ध्यान की अवस्था में ले जाना चाहिए इससे हताशा न होकर इच्छित नतीजा सामने आता है.

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